विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में दांगी समाज की ओर से नि:शुल्क दांगी चिकित्सा शिविर का शुभारंभ
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण
गया जी में आयोजित विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष महासंगम 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा, जिसमें करीब 10 से 12 लाख पिंडदानी व तीर्थ यात्री अपने पितरों को इस भवसागर के आवागमन से मुक्ति दिलाने तथा उन्हें स्वर्ग लोक भेजने की कामना से यहां पिंडदान व तर्पण करने के लिए पधारते हैं।
पितृपक्ष महासंगम-2026 के अवसर पर विष्णु पद मार्ग में आयोजित नि: शुल्क दांगी चिकित्सक संघ के बैनर तले प्रति वर्ष आयोजित होने वाले समारोह का विधिवत् उद्घाटन मुख्य अतिथि गुरुआ विधायक डॉ उपेन्द्र प्रसाद ने किया।
विशिष्ट अतिथि टिकारी विधायक अजय कुमार दांगी, चिकित्सक संघ के सम्मानित अध्यक्ष एवं लोकप्रिय चिकित्सक डॉ जयदेव सिंह, संघ के अध्यक्ष डॉ एस.के.वर्मा ने दांगी समाज द्वारा किये गये इस पहल की तारीफ की।
संघ के रीढ़ एवं सचिव प्रोफेसर राजेश कुमार, अखिल भारतीय दांगी क्षत्रिय संघ के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ . शत्रुघ्न दांगी, नागरिक परिषद सदस्य श्री मती ज्योति दांगी, डॉक्टर यू.के.मधु, डॉक्टर सोनी,डॉ उमेश प्रसाद, डॉक्टर बिनोद कुमार, डॉ रविन्द्र कुमार, डॉ विनय कुमार, डॉ शैलेन्द्र कुमार, डॉ आर.के. तिवारी, डॉ विनय कुमार, डॉ ज़ियाउद्दीन खां, डॉक्टर सुधांशु,शुकदेव प्रसाद एडवोकेट,विजय बाबू कोचर पेट्रोल पंप और अंजनी कुमार विभा होमियो हाल सहित भारी संख्या में विभिन्न स्थानों से आए चिकित्सकों, शुभेच्छुकों एवं तीर्थ यात्रियों ने भाग लिया।
यह शिविर विश्व प्रसिद्ध मोक्ष की भूमि गया जी धाम के विष्णुपद मार्ग में चांदचौरा के पास अहर्निस सेवा देने के लिए विशेष प्रसिद्ध है। इस शिविर की शुरुआत सन् 1992 के पितृपक्ष मेले में वर्तमान हरियाणा भवन के सामने मैदान से आरंभ की गई थी। जिसमें टेबल कुर्सी विजय ठेकेदार,दवा का बाक्स डॉ बी.के. सिंह और प्रथम होमियोपैथिक चिकित्सा का कार्य डॉक्टर शत्रुघ्न दांगी ने संपन्न किया था।
जाने-माने चिकित्सकों की भीड़ उमड़ पड़ी और आज यह शानदार 34 वें वर्ष में अपना परचम लहरा रहा है। इस शिविर के प्रति जिलाधिकारी, सिविल सर्जन, अधिकारियों, मंत्रियों एवं देश विदेश से आए तीर्थ यात्रियों का अटूट विश्वास शिविर के प्रति चिकित्सकों द्वारा दिए गए सेवा के लिए विशेष रूप से है। यही कारण है कि इसे प्रतिवर्ष जिला समाहरणालय की ओर से अनवरत प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जाते हैं।
मान्यता है कि गयाजी के विष्णुपद मंदिर का दर्शन, फल्गु नदी में तर्पण और यहां के 45 वेदियों पर पिंडदान करने से मृतात्मा को शांति, मुक्ति तथा उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
इतिहासकार एवं पुरातत्वविद् डॉक्टर शत्रुघ्न दांगी ने वायु पुराण में वर्णित गयाजी की महिमा को सभी तीर्थों में श्रेष्ठ बताते हुए कहा है कि-"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण। वहीं "ऋग्वेद" के दसवें मंडल में कहा गया है कि मनुष्य अपने पिता,परपिता और पितामह की श्रद्धा पूर्वक पूजा करता है और श्रद्धापूर्वक श्राद्धकर्म करता है, तो वह एक महान "धर्म" कहलाता है।

Guest Editor
डॉ.शत्रुघ्न डांगी
इतिहासकार एवं पुरातत्वविद


